सोमवार, 31 दिसंबर 2012

बता दिजीये मुझे.....

चाहतें मेरी कम है, या चाहना तुम्हे है जुर्म,
इक बार आकर बता दिजीये मुझे।

कब तक जियें, तन्हाई के इन अन्धेरो मे,
इक रौशनी तो दिखा दिजीये मुझे।

बांधे रखूं कब तक, सांसों की लङी को मै,
रुख़सत-ए-वक्त बता दिजीये मुझे।

अपने दिल मे बसाकर, अपना बना लो,
या नज़रो से गिरा दिजीये मुझे।

अपनी कहते हो, ना सुनते हो मेरी कुछ,
बस हकिकत बता दिजीये मुझे।

भटक ना जायें ,जिन्दगी की राहो मे हम,
रास्ता बस वो दिखा दिजीये मुझे।

भर दो खुशियां तुम, जिन्दगी मे मेरी भी,
या खाक मे मिला दिजीये मुझे।                { अधीर }

26 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ... बेहतरीन प्रस्‍तुति

    आभार

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  2. सहज भाषा में भावों से सजी सुन्दर रचना .....बहुत ही अच्छी लगी !

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  3. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 02/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  4. वर्ष की सांध्यबेला पर सुंदर प्रस्तुति
    नववर्ष की हार्दिक बधाई।।।

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  5. कोमल भाव लिए रचना...
    आपको सहपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ...
    :-)

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  6. बेहतरीन लफ्जों में बेहतरीन एहसास पिरो दिया है आपने ... भई वाह।

    बधाई स्वीकारें। :)

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  7. उम्मीद है मोहतरमा ने अब तक बात समझ ली होगी ....:))

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  8. अपनी कहते हो, ना सुनते हो मेरी कुछ,
    बस हकिकत बता दिजीये मुझे ...

    ये तो अदा है हसीनों की ... लुभाते भी हैं ओर बताते नहीं ...
    कमाल के शेर हैं जनाब ...
    नया साल मुबारक ...

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  9. सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    नब बर्ष (2013) की हार्दिक शुभकामना.

    मंगलमय हो आपको नब बर्ष का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    इश्वर की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार.


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  10. वाह ...
    बहुत बढ़िया शेरों से सजी गज़ल...
    दाद कबूल करें..

    नववर्ष मंगलमय हो.

    अनु

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