शनिवार, 26 जनवरी 2013

कविता

हे प्रभू ...

नही चाहिए हमारे देश को....

पश्च्चिम देशो के जैसा विकास,

तन पर ना आधे-अधूरे लिबास,

चाहिए नही है चमक -दमक ,

न अनगिनित पैसो की खनक,

किसी पर नही हमे रौब चाहिए,

न किसी पर हमारा खौफ चाहिए,

नही चाहिए अब कोई विकृति,

लौटा दो हमे हमारी -संस्कृति.

हमे चाहिये तो बस....

वो आपस का भाई चारा,

मेरा प्यारा, भारत न्यारा,

हर दिल में हो देश -भक्ति,

दे दो वो वीरो की सी शक्ति,

पुरे विश्व मे लहराये तिरगें की शान,

हर नज़र में बना रहे बहनों का मान,

हो उन्‍हें सम्‍मान से जीने का हक,

न रहे मेरे देश में अब कोई भी रंक,

बच्चा देश का ,कोई भी भूखा ना सोये ,

कोई माँ अब, बेटियों के दुःख से न रोये,

हे प्रभु ...

इतनी सी हमारी प्रार्थना है ,

कहाँ ये कोई बड़ी कामना है !!!..... [ अधीर ]

14 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति,गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

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  2. सुंदर अभिव्यक्ति,,,
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    recent post: गुलामी का असर,,,

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  3. बहुत ही अच्छी एवं सार्थक सोंच मित्र हार्दिक बधाई

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  4. Nice one, but i still dobut that women in our country are at bad state due to western culture... no culture makes a person vulnerable...

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    1. @Rahul ji..abhut bahut aabhar apka ...badlaav samay ki maang hai usse aap aur hum rok nhi sakte

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  5. बाहुत सुन्दर प्रार्थना है. काश ये जल्दी ही सच हो.

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  6. वाह .... बहुत ही बढिया
    आभार सहित

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