शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

ख्वाब दिल का....

नामुमकिन है मिलना उसका,अब इस ज़िदंगी मे ,
ख्वाब दिल का अब, बिखर ही जाये तो अच्छा है।

कट जायेगा ये सफ़र भी, अंधेरो मे या उजालों मे,
उदासीयों का  दौर अब, गुजर जाये तो अच्छा है।

कब तक जियेगा कोई , किसी की यादों के सहारे ,
दर्द ऑसु बनके ,ऑखों से बह जाये तो अच्छा है।

जानता हुं आसान नही, खुद का खुद से जुदा होना ,
जिदंगी उसकी सही, अब संवर जाये तो अच्छा है।

कब सोचा था कि,जिदंगी मे ऐसा वक़्त भी आयेगा,
आखिरी बार सही,उसका दीदार हो जाये अच्छा है।   

14 टिप्‍पणियां:

  1. नामुमकिन है मिलना उसका,अब इस ज़िदंगी मे ,
    ख्वाब दिल का अब, बिखर ही जाये तो अच्छा है। वाह क्या बात है

    कट जायेगा ये सफ़र भी, अंधेरो मे या उजालों मे,
    उदासीयों का दौर अब, गुजर जाये तो अच्छा है। लाजवाब मित्र

    कब तक जियेगा कोई , किसी की यादों के सहारे ,
    दर्द ऑसु बनके ,ऑखों से बह जाये तो अच्छा है। हाय हाय

    जानता हुं आसान नही, खुद का खुद से जुदा होना ,
    जिदंगी उसकी सही, अब संवर जाये तो अच्छा है। वाह वाह वाह

    कब सोचा था कि,जिदंगी मे ऐसा वक़्त भी आयेगा,
    आखिरी बार सही,उसका दीदार हो जाये अच्छा है। मज़ा आ गया

    खूबसूरती से सजी बेहतरीन लाजवाब प्रस्तुति दिली दाद कुबुलें.

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    1. @ Arun sharma ji ...itni tareef na kijiye ....kuchh kamiya ho to bataye ...mai koi kavi nhi ...bas yuhi..likh leta hu ...

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  2. जानता हुं आसान नही, खुद का खुद से जुदा होना ,
    जिदंगी उसकी सही, अब संवर जाये तो अच्छा है।
    हर शेर लाजवाब ... बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति

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  3. So beautiful!! Suresh ji

    samay mile to humre blog par bhi padhare

    @Sanjay bhaskar
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