गुरुवार, 31 जनवरी 2013

ये फितरत नही है हमारी...

ये फितरत नही है हमारी, भुल जाये अपनी चाहत को,
चाहते रहेगे हम तो जिन्दगी भर, ऐ मुझे भुलाने वाले।

लिख दिया है नाम हमने, दिल की गहराइयों मे तेरा,
ना मिटेगा, कर कोशिशें जितनी भी, ऐ मिटाने वाले।

शम्मे वफा जला के रखेंगें, इस दिल मे जिन्दगी भर,
तुम करो नजरअंदाज चाहे मुझे, दिल से भुलाने वाले।

सह-सह के सितम अब, दिल पत्थर सा हो गया है,
दिल तेरा दुखा तो क्या होगा,सोच मुझे सताने वाले।

मान लिया की बहुत बुरे है, आज तेरी नजरों मे हम,
याद करोगे हमें भी, कभी थे कोई, वफा निभाने वाले।

जिन्दगी मे रह रह के, उठेगी टीस तेरे दिल मे भी,
क्या रह पावोगें अकेले, नजरो से मुझे गिरानेवाले।

फिक्र है मुझे, लेकिन अपनी नही, बस केवल तुम्हारी,
कैसे करोगे सफर, तुम एक अकेले, मुझे डुबोने वाले।

सुनो जंगल के सारे दरख्तो, जागते रहो तुम भी अब,
तन्हा कोई डर ना जाये ,पनाह मे तुम्हारी आनेवाले। {अधीर }

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बेहतरीन और भावपूर्ण गजल..
    शानदार...
    :-)

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  2. फिक्र है मुझे, लेकिन अपनी नही, बस केवल तुम्हारी,
    कैसे करोगे सफर, तुम एक अकेले, मुझे डुबोने वाले।

    वाह !!! बहुत शानदार गजल,,,,बधाई सुरेश जी,,,,

    recent post: कैसा,यह गणतंत्र हमारा,

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  3. सुनो जंगल के सारे दरख्तो, जागते रहो तुम भी अब,
    तन्हा कोई डर ना जाये ,पनाह मे तुम्हारी आनेवाले।

    बहुत खूब, लाजवाब ...

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  4. सभी शेर जबरदस्‍त ... बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने
    आभार

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  5. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल....
    फिक्र है मुझे, लेकिन अपनी नही, बस केवल तुम्हारी,
    कैसे करोगे सफर, तुम एक अकेले, मुझे डुबोने वाले।
    यही तो दीवानगी है मोहब्बत की...
    वाह..

    अनु

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  6. मान लिया की बहुत बुरे है, आज तेरी नजरों मे हम,
    याद करोगे हमें भी, कभी थे कोई, वफा निभाने वाले।
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    sach me sundar likhte hain aap ....

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