बुधवार, 16 जनवरी 2013

मौका फिर हाथ से, निकल जाएगा,


20 टिप्‍पणियां:

  1. पता भी नहीं चलेगा
    तुझे
    और तू मिट गया समझ
    अपने आप को
    ऐ पाक
    अपनी औकात में रह

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  2. वर्ना तेरा ये नाम, इतिहास में रह जाएगा ...
    सार्थकता लिये बेहद उम्‍दा प्रस्‍तुति
    आभार

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  3. बहुत सुंदर उम्दा प्रस्तुति,,,बधाई सुरेश जी,,,

    recent post: मातृभूमि,

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  4. जबरदस्त ,,,,,
    बहुत सही लिखा है आपने ...

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  5. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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  6. रिश्तों में अब मिठास कहाँ रह गयी
    अपना था ही कब जो अब बदल जाएगा...~ज़िंदगी में रिश्ते भी अक्सर ऐसा ही रूप ले लेते हैं...!
    अच्छी रचना !
    ~सादर!!!

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  7. अपना था ही कब जो अब बदल जाएगा.......
    वाकई....जाने कहाँ खो गए अपने और वो अपनापन...
    बहुत सुन्दर रचना..

    अनु

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  8. क्या कहने ..बहुत ही बढीया लिखा
    है आपने ....बहुत खूब....
    :-)

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  9. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
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